जीवन के छोटे आनंद

सवेरे की सूर्य रश्मि
झांकती हुयी आँगन में
अलसाये नैनों को खोल
द्युति का आना प्रांगण में
दाना चुगने गौरैय्या का
सर हिलाना
धीमे से किसी
हरी डाली का मुस्कुराना
लाल जासौन और गुलाबी पंखुड़ियों का लहलहाना
कभी ओस की बूँदों का
पत्तों के पीछे से हलके से शर्माना
कभी किसी उद्दंड झोंके का मुझसे टकराना
फिर सूखे पत्तों को बिखराना
और उड़ा ले जाना
कहीं किसी कोने पर एक कोपल का उगना
और कहीं पके आम का गिरना
वर्षा की कुछ बूंदों का गालों को सहलाना
एक प्याली गर्म चाय का मिल जाना
और घूंटों के बीच
मीठी कविताओं का रचा जाना
