• October 5, 2026

सावन की पुकार

बूंदों की पायल ने की मधुर झंकार 
नस नस अलापने लगे मेघ मलहार 
धरा ने जैसे ओढ़ लिया हो मोतियों का हार 
प्रकृति चहक उठी कर के सोलह श्रृंगार !

बूंदों ने धारण किया ज्यों ही घूँगरू की छम छम 
मानो शाखों ने मृदंग पर ठोकी थाप मद्धम 
वर्षा ने यौवन की दहलीज़ पर रखे कदम 
बूंदों ने की बगावत और भरने लगे झड़ी का दम !!

झड़ी बदलती गयी और अब लिया विकराल रुप भारी 
मूसलाधार सावन के आगमन की हुई तैयारी 
वसुंधरा ने सरगम की लय पर दिखायी नव क्यारी 
मेघों का तबला ढ़ोल पर धिनक धिनक धिन था जारी !

उसके प्यासे हृदय ने किया प्रियतम को याद 
आँसुओं की लगी झड़ी नयन बने आशाढ़ 
उधर आकाश रोया बरस कर की पूरी मुराद 
मगर क्या सुन पाया होगा उस बिरही की फरियाद ??