• June 14, 2026

सावन की पुकार

बूंदों की पायल ने की मधुर झंकार नस नस अलापने लगे मेघ मलहार धरा ने जैसे ओढ़ लिया हो मोतियों का हार प्रकृति चहक उठी कर के सोलह श्रृंगार ! बूंदों ने धारण किया ज्यों ही घूँगरू की छम छम मानो शाखों ने मृदंग पर ठोकी थाप मद्धम वर्षा ने यौवन की दहलीज़ पर रखे कदम बूंदों ने की बगावत और…

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