• June 14, 2026

मेरी कलम

कागज़ और स्याही की होती एक शक्ति विशाल

मेरे शब्द बन जाते हर असहाय की ढाल

जब हो जाते  हावी अक्सर गलत नीतियों के जाल

शब्दों के सार निकालते वहीँ बाल की खाल

कलम से बहती स्याही कर जाती ऐसा कोई कमाल

शब्दों के उत्तर चुप करते हर अन्याय का सवाल

कलम उतरती और बन जाती एक जलती हुयी मशाल

जिसकी लौ की रौशनी चमकती कई सालों  साल

जब कर्म और प्रारब्ध हो जाते आलस्य से निढाल

तब तब कलम करते अनहोनियों को उछाल

कितने कलम बने कितने दुर्जनों का काल

अपनी कलम  को रखना तुम हमेशा संभाल