• June 14, 2026

अहम् ब्रह्मास्मि  

तुम ही तत्व हो, तुम ही सार हो

अपने जीवन का स्वयं तुम आधार हो

जब हर तरफ छा जाये तमस

तुम रोशिनी की  किरण का वार हो

जब हृदय नयन खोल, देखें स्वप्न

तुम्ही स्वयं करते स्वप्न साकार हो

खोजते हो जो किसी लौह पुरुष को

तुम ही अलौकिक अवतार हो

दीन दुखियों  का हो दुःख भंजन

ऐसे जीवित तुम उपकार हो

कहाँ ढूँढ़ते हो बाहर उजाले को

जब तुम ही तोड़ सकते अंधकार हो

अपने अंदर झाँक कर देखो

तुम ही देव, तुम ही जयजयकार हो!